सरकार ने रक्षा मंत्रालय से 10 करोड़ मांगे

सरकार ने रक्षा मंत्रालय से 10 करोड़ मांगे

सरहदी जिलों में सैन्य अभ्यास के दौरान राज्य सार्वजनिक निर्माण विभाग की सम्पति को नुकसान पहुंचता हैं। अभ्यास में सेना के जंगी साजो सामान व टेंक शामिल होने से सडक़ें जर्जर हो जाती हैं। राज्य सरकार के पास इतना बजट नहीं होता कि वह वापिस इन सडक़ों की मरम्मत करवा सके। इसके लिए रक्षा मंत्रालय को 10 करोड़ रुपए का तख्मीना भेजा गया है। यह जानकारी सार्वजनिक निर्माण मंत्री हरेन्द्र मिर्धा ने शुक्रवार को पत्रकारों को एक सवाल के जवाब में दी।

उन्होंने बताया कि लूनी नदी पर पुल बनाने सहित सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कार्यों के लिए बजट के लिए रक्षा मंत्रालय से बात चल रही हैं। हालांकि पहले मंत्रालय ने नानुकर की, लेकिन अब वह बातचीत करने को राजी हो गया है। मिर्धा ने माना कि राज्य सरकार की माली हालत अच्छी नहीं होने से दो सालों तक उनके महकमे ने सडक़ों को दुरस्त करने की दिशा में ठोस काम नहीं किया, लेकिन अब 600 करोड़ का ऋण नाबार्ड से मंजूर होने से प्रदेश में चौबीस हजार किलोमीटर सडक़ों का जीर्णाेद्धार करवाया जाएगा। इस योजना के तहत प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में 120 किमी सडक़ों जीर्णोद्धार होगा।

मंत्री ने बताया कि राज्य स्तर पर इस काम के लिए टेंडर करवा लिए गए हैं। अब वर्क आर्डर देना बाकी है। बाड़मेर-जोधपुर व जैसलमेर-जोधपुर सडक़ मार्गों की दुर्दशा के सवाल पर मिर्धा ने बताया कि इसके लिए मुख्यमंत्री ने केन्द्र से वार्ता की है कि इन मार्गों को डिफेंस रोड़ की परिधि में लिया जाए, ताकि रक्षा प्रायोजन से महत्वपूर्ण इन सडक़ों को समय समय पर कायाकल्प हो सके । जिले में स्कूलों व चिकित्सा केन्द्रों में पद रिक्तता के सवाल पर मंत्री ने कहा कि इस संबंध में शीघ्र निर्णय लिया जाएगा। वैसे नर्सों की भर्ती को लेकर वित्त मंत्री ने हरी झंडी दे दी है।

इस क्षेत्र में तेल व गैस की खोज में लेटलतीफी कें विषय में हरेन्द्र मिर्धा ने कहा कि कंपनियां काम धीरे धीरे कर रही हैं व सालों से इस काम को अपने तक सीमित किए बैठी है। इस काम में तेजी लाने के लिए मुख्यमंत्री ने केन्द्र को लिखा है, क्योंकि इससे राज्य की अर्थव्यवस्था में क्रान्तिकारी बदलाव आना तय है। उन्होंने बताया कि लिग्नाइट आधारित पावर प्लांट को लेकर राज्य सरकार गंभीर है तथा इस संबंध में प्रभावी कार्यवाही अमल में लाई जा रही है।

उन्होने बताया कि ऐसे प्रोजेक्ट पर काम करने से कोई निजी कंपनी तब तक रुचि नहीं लेती, जब तक यहां बुनियादी सुविधाएं मुहैया नहीं हो जाती। राज्य ने केन्द्र को अवगत करवाया है कि ऐसे महत्वाकांक्षी प्राजेक्ट के संबंध में शीघ्र कार्यवाही की जाए, ताकि इसका समय पर लाभ मिल सके। एक सवाल के जवाब में मिर्धा ने बताया कि जनता व जनप्रतिनिधियों का बिजली को लेकर आक्रोश मुखर होना गलत नहीं है,आखिर समस्या बताई नहीं जाएगी तो हल कैसे होगा। उन्होंने कहा कि समस्या बिजली की दरों को लेकर नहीं है, समस्या बिजली की सप्लाई समय पर होने की है। पिछले साल की तुलना मेंं इस साल बिजली सप्लाई को बेहतर बनाने के प्रयास किए गए हैं।

प्रदेश में बिजली के तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में सरकार कृतसंकल्पित है। बालोतरा को जिला बनाने की मांग के प्रत्युतर में प्रभारी मंत्री ने अवगत करवाया गया कि इसके लिए मापदंड निर्धारित करने होंगे। वैसे जिला घोषित करने के लिए कई औपचारिकताओं के साथ बजट की जरूरत होती है, जो इस समय सरकार के पास नहीं है। सरकार यह मंशा रखती जरूर है।

मिर्धा ने बताया कि राज्य सरकार व सांसद केन्द्र सरकार से यह मांग करते रहे है कि रेगिस्तानी क्षेत्र को विशेष दर्जा दिया जाए। इससे इस इलाके का विकास हो सकेगा। संसद पर आतंकवादी हमले की प्रतिक्रिया में मिर्धा ने बताया कि राज्य में स्थिति पर नजर रखी जा रही हैं। उन्होंने इस वारदात मेंं शहीद हुए सुरक्षाकर्मियों को श्रद्घांजलि को देते हुए कहा कि उनकी मुस्तैदी के कारण ही एक भीषण हादसा होते होते टल गया।

जेल में खुला अध्ययन प्रकोष्ठ की स्थापना होगी

उदयपुर केन्द्रीय कारागृह के कैदियों के लिए शीघ्र ही इंदिरा गांधी राष्ट्रीय खुला विश्वविद्यालय द्वारा खुला अध्ययन प्रकोष्ठ शुरू किया जाएगा। इसके लिए आवश्यक सर्वे किया जा चुका है। विश्वस्त सूत्रों के अनुसार जयपुर कारागृृह की भांति उदयपुर में भी खुला अध्ययन प्रकोष्ठ शुरू किया जाएगा, जिससे यहां छठी उत्तीर्ण बंदी सीधे बीए, एमए की परीक्षा दे सकेंगे। इस पर होने वाला खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

मिली जानकारी के अनुसार यह योजना छह माह के भीतर प्रारंभ होने की उम्मीद है। इस योजना से कारागृह में रह कर भी बंदी अपनी कालेज शिक्षा पूरी कर सकेंगे। इंदिरा गांधी खुला विश्वविद्यालय द्वारा बंदियों को उच्च शिक्षा के लिए आवश्यक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी। कारागृह में जल्दी ही कम्प्यूटर शिक्षा और आईटीआई कोर्स शुरू किया जाएगा, जिससे बंदियों को तकनीकी शिक्षा का लाभ भी प्राप्त हो सकेगा।

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